आरोग्यसुधा

योग

योग चिकित्सा

सामान्य शैक्षिक गाइड और व्यक्तिगत योजना — व्यक्तिगत योजना वैद्य समीक्षा के बाद ही।

योग क्या है?

योग शब्द संस्कृत 'युज्' (जोड़ना) से आया है — चित्त, श्वास और शरीर के बीच समन्वय का अभ्यास। आयुर्वेद में योग आहार-विहार के साथ स्वास्थ्य-सहायक जीवनशैली का अंग माना जाता है; यह अकेले रोग-मिटाने का जादू नहीं है।

दर्शन व चिकित्सा दृष्टि

पातंजलि योग-सूत्र I.2 में योग की परिभाषा है: 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' — योग चित्त की वृत्तियों (मन की गति/विकार) का निरोध है। अभ्यास से चित्त की स्थिरता बढ़ सकती है; यह मनोवैज्ञानिक शांति का लक्ष्य है, रोग ठीक करने का दावा नहीं।

संभावित लाभ

नियमित, सही मार्गदर्शन में योग शारीरिक लचक, श्वास-संयम, तनाव-प्रबंधन और एकाग्रता में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद में योग दोष-संतुलन के पूरक के रूप में देखा जाता है। लाभ व्यक्ति-विशिष्ट हैं; गंभीर रोग में वैद्य की अनुमति आवश्यक।

व्यक्तिगत योजना — प्रक्रिया

  1. 1.ऑनलाइन फ़ॉर्म भरें और UPI से ₹499 भुगतान करें
  2. 2.वैद्य आदित्य घोसल्या समीक्षा करेंगे (आमतौर पर 48 घंटे के भीतर)
  3. 3.यदि उपयुक्त हो तो आसन–प्राणायाम योजना ईमेल या WhatsApp पर भेजी जाएगी
  4. 4.यह निदान नहीं — शैक्षिक, व्यक्तिगत योग मार्गदर्शन है

यह शैक्षिक व सहायक योग मार्गदर्शन है; रोग ठीक करने या औषधि बदलने का विकल्प नहीं। गंभीर लक्षण में चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य।

व्यक्तिगत योग चिकित्सा योजना

रोग-विशिष्ट योग योजना वैद्य की मंजूरी के बाद ही तैयार की जाती है। पहले परामर्श/मूल्यांकन → यदि उपयुक्त हो तो आसन, प्राणायाम व विश्राम का व्यक्तिगत कार्यक्रम। योजना ईमेल या WhatsApp पर केवल अनुमोदन के बाद भेजी जाती है — स्वतः नहीं।

499 · UPI

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UPI: caditya9191@ybl · Arogya Sudha Hospital

अष्टांग योग — आठ अंग

यम

YS II.30

अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह — सामाजिक व नैतिक आचरण की दिशा।

नियम

YS II.32

शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वरप्रणिधान — व्यक्तिगत अनुशासन व आत्म-अध्ययन।

आसन

YS II.46–48

स्थिर व सुखद मुद्रा — शरीर को ध्यान-योग के लिए तैयार करना; केवल व्यायाम नहीं।

प्राणायाम

YS II.49–52

श्वास-प्रश्वास का नियंत्रित अभ्यास — प्राण-शक्ति व चित्त-शांति की दिशा।

प्रत्याहार

YS II.54–55

इन्द्रियों को बाह्य विषयों से हटाना — आंतरिक एकाग्रता की तैयारी।

धारणा

YS III.1

एक बिंदु या विषय पर मन को स्थिर करना — ध्यान का पूर्वचरण।

ध्यान

YS III.2

निरंतर, अविच्छिन्न धारणा — चित्त की प्रवाह-रूप एकाग्रता।

समाधि

YS III.3

विषय व चित्त का एकीकरण — योग-मार्ग का परम लक्ष्य; चिकित्सा-दावा नहीं।

सूर्य नमस्कार — 12 चरण

  1. 1.प्रणामासन
  2. 2.हस्त उत्तानासन
  3. 3.हस्त पादासन
  4. 4.अश्व संचालनासन
  5. 5.दंडासन
  6. 6.अष्टांग नमस्कार
  7. 7.भुजंगासन
  8. 8.अधोमुख श्वानासन
  9. 9.अश्व संचालनासन
  10. 10.हस्त पादासन
  11. 11.हस्त उत्तानासन
  12. 12.प्रणामासन

आसन पुस्तकालय

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पद्मासन (Padmasana — Lotus Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

पद्मासन

Padmasana — Lotus Pose

दोनों पैरों को विपरीत जंघा पर रखकर, रीढ़ सीधी रख कर बैठा जाता है — ध्यान व प्राणायाम के लिए शास्त्रों में सर्वाधिक वर्णित आसन। हठयोग प्रदीपिका में ध्यान-आसन के रूप में उल्लेख।

मन की स्थिरता व एकाग्रता में सहायक माना जाता है।

घुटने या टखने में चोट/जकड़न में बिना अभ्यास ज़बरदस्ती न करें; सुखासन से आरम्भ करें।

पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana — Seated Forward Bend) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

पश्चिमोत्तानासन

Paschimottanasana — Seated Forward Bend

बैठ कर दोनों पैर सामने फैलाए जाते हैं, फिर धड़ को आगे झुका कर सिर घुटनों की ओर लाया जाता है, हाथ पैरों को पकड़ते हैं। हठ परंपरा में पश्चिमाभिमुख आसनों में प्रमुख।

पीठ व हैमस्ट्रिंग की लचक तथा पाचन में सहायक माना जाता है।

पीठ की गम्भीर चोट, स्लिप डिस्क या गर्भावस्था में वैद्य से पूछकर ही करें।

गोमुखासन (Gomukhasana — Cow-Face Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

गोमुखासन

Gomukhasana — Cow-Face Pose

एक हाथ पीठ के पीछे नीचे से और दूसरा ऊपर से घुमा कर, कंधों के बीच उँगलियाँ जोड़ी जाती हैं; पैर एक-दूसरे के ऊपर मोड़े जाते हैं।

कंधों व कूल्हों की जकड़न कम करने में सहायक माना जाता है।

कंधे में हाल की चोट या सूजन में हाथों की स्थिति हल्की रखें, ज़बरदस्ती न करें।

धनुरासन (Dhanurasana — Bow Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

धनुरासन

Dhanurasana — Bow Pose

पेट के बल लेट कर दोनों घुटने मोड़े जाते हैं, हाथों से टखने पकड़ कर छाती व जाँघें ऊपर उठाई जाती हैं — शरीर धनुष के आकार में आता है।

पीठ की मांसपेशियों व मेरुदंड की लचक में सहायक माना जाता है।

उच्च रक्तचाप, हर्निया, गर्भावस्था या पीठ की गम्भीर समस्या में न करें।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana — Half Spinal Twist) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

अर्ध मत्स्येन्द्रासन

Ardha Matsyendrasana — Half Spinal Twist

बैठ कर एक पैर मोड़ कर दूसरे के ऊपर रखा जाता है, फिर धड़ को उसी ओर घुमाया जाता है, विपरीत हाथ घुटने के बाहर टिकता है।

रीढ़ की गति व पाचन-तंत्र को उद्दीपित करने में सहायक माना जाता है।

रीढ़ की गम्भीर चोट या हाल की उदर-शल्यक्रिया में सावधानी रखें।

सेतुबंध आसन (Setu Bandhasana — Bridge Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

सेतुबंध आसन

Setu Bandhasana — Bridge Pose

पीठ के बल लेट कर घुटने मोड़े जाते हैं, पैर ज़मीन पर टिके रहते हैं, और कूल्हों को ऊपर उठा कर कंधे-से-घुटने तक एक सेतु बनाया जाता है।

पीठ के निचले भाग को बल तथा मानसिक शांति में सहायक माना जाता है।

गर्दन या कंधे की चोट में सिर व गर्दन पर भार न डालें।

भुजंगासन (Bhujangasana — Cobra Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

भुजंगासन

Bhujangasana — Cobra Pose

पेट के बल लेट कर हथेलियाँ कंधों के नीचे रखी जाती हैं, फिर भुजाओं के सहारे धीरे-धीरे छाती व सिर ऊपर उठाया जाता है, कमर ज़मीन पर टिकी रहती है। सूर्य नमस्कार व हठयोग में मूलभूत पृष्ठभाग आसन।

पीठ की मांसपेशियों को बल व मुद्रा-सुधार में सहायक माना जाता है।

गर्भावस्था, कलाई की चोट या पीठ की गम्भीर समस्या में सावधानी या परहेज़ करें।

मयूरासन (Mayurasana — Peacock Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

मयूरासन

Mayurasana — Peacock Pose

हथेलियाँ ज़मीन पर, कोहनियाँ नाभि के पास टिका कर, पूरे शरीर को क्षैतिज संतुलन में हवा में उठाया जाता है — बल व संतुलन का उन्नत आसन।

कलाई-भुजाओं के बल व पाचन-अग्नि में सहायक माना जाता है।

उच्च रक्तचाप, हर्निया, गर्भावस्था या कलाई-कोहनी की चोट में न करें; शुरुआती अभ्यास में वैद्य/प्रशिक्षक की देखरेख लें।

हलासन (Halasana — Plough Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

हलासन

Halasana — Plough Pose

पीठ के बल लेट कर दोनों पैरों को ऊपर व पीछे सिर के पार ले जाया जाता है, पंजे ज़मीन को छूते हैं — शरीर हल के आकार में आता है।

रीढ़ की लचक व तंत्रिका-तंत्र को शांत करने में सहायक माना जाता है।

गर्दन की चोट, उच्च रक्तचाप या गर्भावस्था में न करें; शुरुआत में सहारे के साथ करें।

गरुड़ासन (Garudasana — Eagle Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

गरुड़ासन

Garudasana — Eagle Pose

एक पैर पर खड़े होकर दूसरा पैर उसके चारों ओर लपेटा जाता है, और दोनों भुजाएँ भी एक-दूसरे के चारों ओर लिपटती हैं — संतुलन का आसन।

एकाग्रता व टखने-घुटने के संतुलन में सहायक माना जाता है।

घुटने की हाल की चोट में सावधानी रखें, दीवार के सहारे अभ्यास करें।

उत्कट कोणासन (Utkata Konasana — Goddess Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

उत्कट कोणासन

Utkata Konasana — Goddess Pose

पैर चौड़े कर, पंजे बाहर की ओर, घुटने मोड़ कर बैठक ली जाती है, भुजाएँ कोहनी से मोड़ कर ऊपर उठाई जाती हैं।

जाँघों-कूल्हों के बल व श्वास-क्षमता में सहायक माना जाता है।

घुटने या कूल्हे की गम्भीर समस्या में गहराई कम रखें।

वीरभद्रासन (Virabhadrasana III — Warrior III) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

वीरभद्रासन

Virabhadrasana III — Warrior III

एक पैर पर खड़े होकर दूसरा पैर व दोनों भुजाएँ ज़मीन के समानांतर पीछे-आगे फैलाई जाती हैं — शरीर एक सीधी रेखा बनाता है।

संतुलन, एकाग्रता व टाँगों के बल में सहायक माना जाता है।

रक्तचाप की समस्या या संतुलन में कठिनाई हो तो दीवार/कुर्सी के सहारे करें।

चक्रासन (Chakrasana — Wheel Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

चक्रासन

Chakrasana — Wheel Pose

पीठ के बल लेट कर हथेलियाँ व पंजे ज़मीन पर टिका कर पूरे शरीर को ऊपर उठाया जाता है, रीढ़ पीछे की ओर एक चाप बनाती है।

रीढ़ की लचक व भुजाओं-टाँगों के बल में सहायक माना जाता है — उन्नत अभ्यासकों के लिए।

पीठ, कलाई या हृदय की समस्या, उच्च/निम्न रक्तचाप या गर्भावस्था में न करें; प्रशिक्षक की देखरेख आवश्यक।

अंजनेयासन (Anjaneyasana — Crescent Lunge) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

अंजनेयासन

Anjaneyasana — Crescent Lunge

एक पैर आगे मोड़ कर, दूसरा पीछे सीधा फैला कर गहरी लंज ली जाती है, भुजाएँ ऊपर की ओर फैली रहती हैं।

जाँघों-कूल्हों की लचक व टाँगों के बल में सहायक माना जाता है।

घुटने की चोट में अगले घुटने को पंजे के आगे न जाने दें।

वृक्षासन (Vrikshasana — Tree Pose) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

वृक्षासन

Vrikshasana — Tree Pose

एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर का तलवा भीतरी जाँघ पर टिकाया जाता है, हाथ प्रणाम-मुद्रा में सिर के ऊपर जोड़े जाते हैं।

संतुलन, एकाग्रता व टखने के बल में सहायक माना जाता है।

चक्कर आने की प्रवृत्ति या घुटने की समस्या में दीवार का सहारा लें।

उत्तानासन (Uttanasana — Standing Forward Bend) — आरोग्यसुधा जयपुर में योग चिकित्सा आसन

उत्तानासन

Uttanasana — Standing Forward Bend

खड़े होकर कूल्हों से आगे झुका जाता है, सिर घुटनों की ओर लटकता है, हाथ पंजों या ज़मीन तक पहुँचते हैं।

पीठ-हैमस्ट्रिंग की लचक व मानसिक शांति में सहायक माना जाता है।

पीठ की चोट या उच्च रक्तचाप में घुटने हल्के मोड़ कर रखें, सिर को अचानक न उठाएँ।

संदर्भ ग्रंथ

पातंजलि योग-सूत्र

योग दर्शन का मूल ग्रंथ — अष्टांग योग, चित्त-वृत्ति-निरोध की परिभाषा।

हठयोग प्रदीपिका

स्वात्माराम द्वारा — आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध का प्राचीन वर्णन।

भगवद्गीता (योग अध्याय)

कर्मयोग, भक्तियोग, राजयोग का संक्षिप्त दार्शनिक परिचय।

लाइट ऑन योग — बी.के.एस. अयंगर

आधुनिक युग में आसन-विज्ञान व चिकित्सीय संदर्भ का व्यापक संदर्भ-ग्रंथ।

योग मकरन्द — टी. कृष्णमाचार्य परंपरा

वैदिक-हठ परंपरा में आसन-प्राणायाम का ऐतिहासिक दस्तावेज़।

चरक संहिता (योग-विहार संदर्भ)

आयुर्वेद में व्यायाम, ध्यान व जीवनशैली का शास्त्रीय उल्लेख।

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