योग क्या है?
योग शब्द संस्कृत 'युज्' (जोड़ना) से आया है — चित्त, श्वास और शरीर के बीच समन्वय का अभ्यास। आयुर्वेद में योग आहार-विहार के साथ स्वास्थ्य-सहायक जीवनशैली का अंग माना जाता है; यह अकेले रोग-मिटाने का जादू नहीं है।
योग
सामान्य शैक्षिक गाइड और व्यक्तिगत योजना — व्यक्तिगत योजना वैद्य समीक्षा के बाद ही।
योग शब्द संस्कृत 'युज्' (जोड़ना) से आया है — चित्त, श्वास और शरीर के बीच समन्वय का अभ्यास। आयुर्वेद में योग आहार-विहार के साथ स्वास्थ्य-सहायक जीवनशैली का अंग माना जाता है; यह अकेले रोग-मिटाने का जादू नहीं है।
पातंजलि योग-सूत्र I.2 में योग की परिभाषा है: 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' — योग चित्त की वृत्तियों (मन की गति/विकार) का निरोध है। अभ्यास से चित्त की स्थिरता बढ़ सकती है; यह मनोवैज्ञानिक शांति का लक्ष्य है, रोग ठीक करने का दावा नहीं।
नियमित, सही मार्गदर्शन में योग शारीरिक लचक, श्वास-संयम, तनाव-प्रबंधन और एकाग्रता में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद में योग दोष-संतुलन के पूरक के रूप में देखा जाता है। लाभ व्यक्ति-विशिष्ट हैं; गंभीर रोग में वैद्य की अनुमति आवश्यक।
यह शैक्षिक व सहायक योग मार्गदर्शन है; रोग ठीक करने या औषधि बदलने का विकल्प नहीं। गंभीर लक्षण में चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य।
YS II.30
अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह — सामाजिक व नैतिक आचरण की दिशा।
YS II.32
शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वरप्रणिधान — व्यक्तिगत अनुशासन व आत्म-अध्ययन।
YS II.46–48
स्थिर व सुखद मुद्रा — शरीर को ध्यान-योग के लिए तैयार करना; केवल व्यायाम नहीं।
YS II.49–52
श्वास-प्रश्वास का नियंत्रित अभ्यास — प्राण-शक्ति व चित्त-शांति की दिशा।
YS II.54–55
इन्द्रियों को बाह्य विषयों से हटाना — आंतरिक एकाग्रता की तैयारी।
YS III.1
एक बिंदु या विषय पर मन को स्थिर करना — ध्यान का पूर्वचरण।
YS III.2
निरंतर, अविच्छिन्न धारणा — चित्त की प्रवाह-रूप एकाग्रता।
YS III.3
विषय व चित्त का एकीकरण — योग-मार्ग का परम लक्ष्य; चिकित्सा-दावा नहीं।
योग खंड Instagram: @theyogikvaidya
Padmasana — Lotus Pose
दोनों पैरों को विपरीत जंघा पर रखकर, रीढ़ सीधी रख कर बैठा जाता है — ध्यान व प्राणायाम के लिए शास्त्रों में सर्वाधिक वर्णित आसन। हठयोग प्रदीपिका में ध्यान-आसन के रूप में उल्लेख।
मन की स्थिरता व एकाग्रता में सहायक माना जाता है।
घुटने या टखने में चोट/जकड़न में बिना अभ्यास ज़बरदस्ती न करें; सुखासन से आरम्भ करें।
Paschimottanasana — Seated Forward Bend
बैठ कर दोनों पैर सामने फैलाए जाते हैं, फिर धड़ को आगे झुका कर सिर घुटनों की ओर लाया जाता है, हाथ पैरों को पकड़ते हैं। हठ परंपरा में पश्चिमाभिमुख आसनों में प्रमुख।
पीठ व हैमस्ट्रिंग की लचक तथा पाचन में सहायक माना जाता है।
पीठ की गम्भीर चोट, स्लिप डिस्क या गर्भावस्था में वैद्य से पूछकर ही करें।
Gomukhasana — Cow-Face Pose
एक हाथ पीठ के पीछे नीचे से और दूसरा ऊपर से घुमा कर, कंधों के बीच उँगलियाँ जोड़ी जाती हैं; पैर एक-दूसरे के ऊपर मोड़े जाते हैं।
कंधों व कूल्हों की जकड़न कम करने में सहायक माना जाता है।
कंधे में हाल की चोट या सूजन में हाथों की स्थिति हल्की रखें, ज़बरदस्ती न करें।
Dhanurasana — Bow Pose
पेट के बल लेट कर दोनों घुटने मोड़े जाते हैं, हाथों से टखने पकड़ कर छाती व जाँघें ऊपर उठाई जाती हैं — शरीर धनुष के आकार में आता है।
पीठ की मांसपेशियों व मेरुदंड की लचक में सहायक माना जाता है।
उच्च रक्तचाप, हर्निया, गर्भावस्था या पीठ की गम्भीर समस्या में न करें।
Ardha Matsyendrasana — Half Spinal Twist
बैठ कर एक पैर मोड़ कर दूसरे के ऊपर रखा जाता है, फिर धड़ को उसी ओर घुमाया जाता है, विपरीत हाथ घुटने के बाहर टिकता है।
रीढ़ की गति व पाचन-तंत्र को उद्दीपित करने में सहायक माना जाता है।
रीढ़ की गम्भीर चोट या हाल की उदर-शल्यक्रिया में सावधानी रखें।
Setu Bandhasana — Bridge Pose
पीठ के बल लेट कर घुटने मोड़े जाते हैं, पैर ज़मीन पर टिके रहते हैं, और कूल्हों को ऊपर उठा कर कंधे-से-घुटने तक एक सेतु बनाया जाता है।
पीठ के निचले भाग को बल तथा मानसिक शांति में सहायक माना जाता है।
गर्दन या कंधे की चोट में सिर व गर्दन पर भार न डालें।
Bhujangasana — Cobra Pose
पेट के बल लेट कर हथेलियाँ कंधों के नीचे रखी जाती हैं, फिर भुजाओं के सहारे धीरे-धीरे छाती व सिर ऊपर उठाया जाता है, कमर ज़मीन पर टिकी रहती है। सूर्य नमस्कार व हठयोग में मूलभूत पृष्ठभाग आसन।
पीठ की मांसपेशियों को बल व मुद्रा-सुधार में सहायक माना जाता है।
गर्भावस्था, कलाई की चोट या पीठ की गम्भीर समस्या में सावधानी या परहेज़ करें।
Mayurasana — Peacock Pose
हथेलियाँ ज़मीन पर, कोहनियाँ नाभि के पास टिका कर, पूरे शरीर को क्षैतिज संतुलन में हवा में उठाया जाता है — बल व संतुलन का उन्नत आसन।
कलाई-भुजाओं के बल व पाचन-अग्नि में सहायक माना जाता है।
उच्च रक्तचाप, हर्निया, गर्भावस्था या कलाई-कोहनी की चोट में न करें; शुरुआती अभ्यास में वैद्य/प्रशिक्षक की देखरेख लें।
Halasana — Plough Pose
पीठ के बल लेट कर दोनों पैरों को ऊपर व पीछे सिर के पार ले जाया जाता है, पंजे ज़मीन को छूते हैं — शरीर हल के आकार में आता है।
रीढ़ की लचक व तंत्रिका-तंत्र को शांत करने में सहायक माना जाता है।
गर्दन की चोट, उच्च रक्तचाप या गर्भावस्था में न करें; शुरुआत में सहारे के साथ करें।
Garudasana — Eagle Pose
एक पैर पर खड़े होकर दूसरा पैर उसके चारों ओर लपेटा जाता है, और दोनों भुजाएँ भी एक-दूसरे के चारों ओर लिपटती हैं — संतुलन का आसन।
एकाग्रता व टखने-घुटने के संतुलन में सहायक माना जाता है।
घुटने की हाल की चोट में सावधानी रखें, दीवार के सहारे अभ्यास करें।
Utkata Konasana — Goddess Pose
पैर चौड़े कर, पंजे बाहर की ओर, घुटने मोड़ कर बैठक ली जाती है, भुजाएँ कोहनी से मोड़ कर ऊपर उठाई जाती हैं।
जाँघों-कूल्हों के बल व श्वास-क्षमता में सहायक माना जाता है।
घुटने या कूल्हे की गम्भीर समस्या में गहराई कम रखें।
Virabhadrasana III — Warrior III
एक पैर पर खड़े होकर दूसरा पैर व दोनों भुजाएँ ज़मीन के समानांतर पीछे-आगे फैलाई जाती हैं — शरीर एक सीधी रेखा बनाता है।
संतुलन, एकाग्रता व टाँगों के बल में सहायक माना जाता है।
रक्तचाप की समस्या या संतुलन में कठिनाई हो तो दीवार/कुर्सी के सहारे करें।
Chakrasana — Wheel Pose
पीठ के बल लेट कर हथेलियाँ व पंजे ज़मीन पर टिका कर पूरे शरीर को ऊपर उठाया जाता है, रीढ़ पीछे की ओर एक चाप बनाती है।
रीढ़ की लचक व भुजाओं-टाँगों के बल में सहायक माना जाता है — उन्नत अभ्यासकों के लिए।
पीठ, कलाई या हृदय की समस्या, उच्च/निम्न रक्तचाप या गर्भावस्था में न करें; प्रशिक्षक की देखरेख आवश्यक।
Anjaneyasana — Crescent Lunge
एक पैर आगे मोड़ कर, दूसरा पीछे सीधा फैला कर गहरी लंज ली जाती है, भुजाएँ ऊपर की ओर फैली रहती हैं।
जाँघों-कूल्हों की लचक व टाँगों के बल में सहायक माना जाता है।
घुटने की चोट में अगले घुटने को पंजे के आगे न जाने दें।
Vrikshasana — Tree Pose
एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर का तलवा भीतरी जाँघ पर टिकाया जाता है, हाथ प्रणाम-मुद्रा में सिर के ऊपर जोड़े जाते हैं।
संतुलन, एकाग्रता व टखने के बल में सहायक माना जाता है।
चक्कर आने की प्रवृत्ति या घुटने की समस्या में दीवार का सहारा लें।
Uttanasana — Standing Forward Bend
खड़े होकर कूल्हों से आगे झुका जाता है, सिर घुटनों की ओर लटकता है, हाथ पंजों या ज़मीन तक पहुँचते हैं।
पीठ-हैमस्ट्रिंग की लचक व मानसिक शांति में सहायक माना जाता है।
पीठ की चोट या उच्च रक्तचाप में घुटने हल्के मोड़ कर रखें, सिर को अचानक न उठाएँ।
योग दर्शन का मूल ग्रंथ — अष्टांग योग, चित्त-वृत्ति-निरोध की परिभाषा।
स्वात्माराम द्वारा — आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध का प्राचीन वर्णन।
कर्मयोग, भक्तियोग, राजयोग का संक्षिप्त दार्शनिक परिचय।
आधुनिक युग में आसन-विज्ञान व चिकित्सीय संदर्भ का व्यापक संदर्भ-ग्रंथ।
वैदिक-हठ परंपरा में आसन-प्राणायाम का ऐतिहासिक दस्तावेज़।
आयुर्वेद में व्यायाम, ध्यान व जीवनशैली का शास्त्रीय उल्लेख।
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